छत्तीसगढ़ में ‘स्कैबीज’ का अटैक : शरीर पर दाने, चकते, खुजली… नजरअंदाज न करें, तुरंत इलाज कर
RNNEWS CHHATTISHGARH
10/12/19
Sunil kumar puraina
रायपुर.छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर इन दिनों स्कैबीज की चपेट में आ गई है। अगर आपकों गर्दन के नीचे के अंगों में अगर छोटे-छोटे दाने दिखें और तेज खुजली हो तो इसे नजरअंदाज न करें। यह स्कैबीज के ही लक्षण है।
रायपुर सहित अब स्कैबीज पूरे छत्तीसगढ़ में पांव पसार रही है और महामारी का रूप ले रही है। यह बीमारी 30 सालों बाद अटैक करती है।
इसका समय पर इलाज नहीं करने से पीडि़त मरीज को लंबे समय तक प्रभावित कर देती है। साथ ही वायरल होने का डऱ भी बना रहा है। रायपुर के सरकारी अस्पतालों में रोज लगभग स्कैबीज के 50 से 60 मरीज लगातार पहुंच रहे है।
आसानी से फैलने वाली है यह बीमारी
एम्स रायपुर सहित आंबेडकर अस्पताल, जिला अस्पताल और सामुदायिक केंद्र में तो इसके लिए अलग से ड्यूटी तक लगा दी है, जो स्कैबीज के मरीजों को बताते हैं कि उन्हें क्या-क्या सावधानी बरतनी है।
यह बीमारी किसी व्यक्ति को हुई तो बड़ी आसानी से उसके परिवारजनों में फैल जाती है।
हर 30 साल में करती है अटैक
स्कैबीज का अटैक हर तीस साल में एक बार होता है। पहली बार 1960 में यह फैला था उसके बाद 1990 में स्कैबीज का अटैक हुआ। 2019-20 भी स्कैबीज के अटैक का वर्ष माना जा रहा है।
आसान है इलाज
स्कैबीज के इलाज के लिए डॉक्टर एक क्रीम लिखते हैं, जो सरकारी अस्पतालों में बेहद आसानी से मिलती है। इसे रात में गर्दन के नीचे के पूरे शरीर में तेल की तरह लगाना होता है। क्रीम महज एक बार आठ घंटे तक लगाए रहने से यह ठीक हो जाती है। कई मरीज सिर्फ इंफेक्टेड हिस्से पर क्रीम लगाते हैं, जिससे वह पूरी तरह ठीक नहीं हो पाते।
गंदगी से होता है इंफेक्शन
डॉक्टरों ने बताया कि गंदगी के कारण यह इंफेक्शन हो जाता है। ठीक से साफ-सफाई रखी जाए तो इस इंफेक्शन से आसानी से बचा जा सकता है। ठंड में लोग कम नहाते हैं। यही वजह है कि यह बीमारी सर्दी में ही पांव पसारती है।
कुत्ते और बिल्ली पाले हैं तो रहें सतर्क
सामान्य तौर पर कुत्ते व बिल्लियों के शरीर में पाए जाते हैं। इन जानवरों से यह इंसानों के शरीर में पहुंचते है। सारकॉप्टीज स्केबियाई मानव शरीर में पहुंचते ही त्वचा के भीतर ‘सुरंग’ बनाते हैं, जिसे बरोज कहा जाता है। इसी टनल में ये प्रजनन करते हैं और पूरे शरीर में संक्रमण फैलाते हैं।
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